खाद्य विभाग की कथित मेहरबानी से पूरे जिले में चावल धांधली का खेल?

सारंगढ़-बिलाईगढ़: जिले के खाद्य विभाग और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े और गंभीर गड़बड़ी का मामला सामने आया है। कागज़ों और ऑनलाइन पोर्टल पर शासकीय उचित मूल्य की दुकानों में चावल का भारी-भरकम स्टॉक दिखाई दे रहा है, जबकि धरातल पर राशन दुकानें खाली पड़ी हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ऑनलाइन दर्ज यह स्टॉक जमीनी हकीकत से कोसों दूर है, जिससे एक बड़े घोटाले की बू आ रही है।
टिमरलगा से लेकर जेवरा तक…पोर्टल पर चावल, दुकानों में सन्नाटा!
जिले के तीनों विकासखंडों के अंतर्गत आने वाली प्रमुख शासकीय उचित मूल्य दुकानों—टिमरलगा, जेवरा, खुर्शी, फर्शवानी, उलखर,सारंगढ़ और अन्य सभी में पोर्टल और धरातल के बीच भारी अंतर देखने को मिल रहा है। ऑनलाइन सिस्टम में इन दुकानों के खाते में क्विंटल चावल दर्ज है, लेकिन यदि मौके पर जाकर देखा जाए तो गोदाम और दुकानें खाली पड़ी हैं।
अधिकारियों की सरपरस्ती में फल-फूल रहा खेल!
हैरानी की बात यह है कि इस भारी अंतर के बावजूद जिला खाद्य अधिकारी और संबंधित जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदकर बैठे हैं। नियमतः इस प्रकार के फर्जी या काल्पनिक स्टॉक का संज्ञान लेते हुए आवंटन में कटौती की जानी चाहिए थी, लेकिन अधिकारियों की कथित मिलीभगत से इन दुकानों (टिमरलगा, जेवरा, खुर्शी, फर्शवानी,उलखर सारंगढ़) को लगातार नया चावल जारी किया जा रहा है। अधिकारियों की इस मेहरबानी से PDS संचालक पोर्टल पर दर्ज अपने इस “काल्पनिक स्टॉक” को लेकर चिंतित होने के बजाय पूरी तरह बेखौफ घूम रहे हैं।
सरकारी कर्ज चुकाने के बजाय बेचकर भर रहे अपनी जेबें
दरअसल, ऑनलाइन पोर्टल पर दिखने वाला यह बकाया स्टॉक PDS संचालकों के सिर पर एक तरह का सरकारी कर्ज है, जिसे भौतिक रूप से जमा या समायोजित किया जाना चाहिए। लेकिन टिमरलगा, जेवरा, खुर्शी, फर्शवानी,उलखर और सारंगढ़ जैसी दुकानों के संचालक इसे लौटाने या सही जगह पहुंचाने के बजाय कालाबाज़ारी कर खुले बाजार में बेच चुके हैं और अपनी जेबें भरने में लगे हैं।
गरीबों के निवाले पर डाका और उठते गंभीर सवाल
इस पूरे खेल से साफ है कि सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में सरकारी तंत्र और राशन माफिया की जुगलबंदी से गरीबों के हक के राशन पर सरेआम डाका डाला जा रहा है।
आखिर जब टिमरलगा, जेवरा, खुर्शी, फर्शवानी,उलखर और सारंगढ़ की दुकानों में धरातल पर चावल उपलब्ध ही नहीं है, तो ऑनलाइन पोर्टल पर इतना विशाल स्टॉक कैसे दिख रहा है?
क्या जिला खाद्य अधिकारी और निरीक्षण दल ने कभी इन दुकानों का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) करने की ज़हमत उठाई?
बिना जमीनी स्टॉक की जांच किए नया आवंटन जारी कर आखिर किसे फायदा पहुंचाया जा रहा है?
इस संबंध में कई बार समाचार प्रकाशित कर संबंधित अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराया जा चुका है। इसके बावजूद अब तक जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। लगातार उठ रहे सवालों के बीच संबंधित अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। ऐसे में जिलेभर में चावल के स्टॉक और वितरण व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों पर प्रशासन कब जांच और कार्रवाई करेगा, यह बड़ा सवाल बना हुआ है। हालांकि अभी इस पर आधिकारिक बयान आना बाकी है। जैसे ही इस सम्बन्ध में अधिकारिक बयान आता है उनका भी पक्ष रखा जाएगा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अब उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच और इन दुकानों के तत्काल भौतिक सत्यापन की आवश्यकता है, ताकि कागजी फेरबदल के इस बड़े खेल का पर्दाफाश हो सके और दोषी व्यक्तियों व संचालकों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके।




