सारंगढ

ऑनलाइन पोर्टल में दर्ज 629 क्विंटल राशन गायब, धरातल पर खाली गोदाम! PDS संचालक बेपरवाह, बोले—”खाद्य अधिकारी से पूछो”

सारंगढ़-बिलाईगढ़ – सारंगढ़ विकासखंड अंतर्गत आने वाले ग्राम जेवरा के शासकीय उचित मूल्य के दुकान संतोषी महिला स्व सहायता समूह ID क्रमांक 412003023 (PDS) में कागजों और ऑनलाइन पोर्टल पर तो खाद्यान्न का भारी-भरकम स्टॉक दर्ज है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। पोर्टल पर दर्ज सैकड़ों क्विंटल चावल आखिर गया कहां? यह सवाल अब प्रशासनिक व्यवस्था और वितरण प्रणाली पर गंभीर निशान खड़े कर रहा है।

पोर्टल पर 629 क्विंटल का ‘अंकीय पहाड़’, दुकान में सन्नाटा
सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल के आंकड़ों पर नजर डालें तो केवल सितंबर माह का ही 629 क्विंटल चावल ग्राम जेवरा की उचित मूल्य दुकान के खाते में दर्ज है। नियम और व्यवस्था के मुताबिक, पोर्टल पर दिख रहा यह विशाल स्टॉक भौतिक रूप से दुकान के गोदाम में मौजूद होना चाहिए। परंतु जब मौके की स्थिति देखी गई, तो दुकान में चावल का अता-पता तक नहीं था।

संचालक का गैर-जिम्मेदाराना जवाब: “खाद्य अधिकारी से पूछो”
जब इस गंभीर गड़बड़ी और खाद्यान्न के गायब होने के संबंध में पीडीएस संचालक से सीधे सवाल किया गया, तो उनका जवाब बेहद गैर-जिम्मेदाराना और संदिग्ध नजर आया। संचालक ने साफ शब्दों में अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए कहा— “खाद्य अधिकारी से पूछो कि कितना स्टॉक है, वही बता पाएंगे। मेरे पास वर्तमान में दुकान में चावल नहीं है।”

हद तो तब हो गई जब उनसे पिछले माह (अगस्त) के स्टॉक के संबंध में पूछा गया। इस पर बेपरवाही से जवाब देते हुए संचालक ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है और वे “धीरे-धीरे स्टॉक मेंटेन” कर रहे हैं।

कालाबाजारी की बू, उठ रहे तीखे सवाल
जब ऑनलाइन पोर्टल चीख-चीख कर 629 क्विंटल चावल का भारी स्टॉक दर्ज दिखा रहा है, तो धरातल पर गोदाम खाली क्यों हैं? यदि राशन दुकान में मौजूद नहीं है, तो क्या गरीबों के हक का यह सैकड़ों क्विंटल चावल बाजार में बेचा जा चुका है?

संचालक के बयानों और धरातल की स्थिति से स्पष्ट रूप से खाद्यान्न हेराफेरी और कालाबाजारी की बू आ रही है। गरीबों के पेट पर डाका डालने का यह खेल किसके संरक्षण में चल रहा है, यह बड़ा जांच का विषय है।

प्रशासनिक चुप्पी पर उठे सवाल
1. कागजों में दर्ज 629 क्विंटल चावल आखिर धरातल से गायब होकर किसकी जेब में गया?
2. क्या खाद्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से यह पूरा खेल रचा जा रहा है?
3. स्टॉक मेंटेनेंस के नाम पर आंकड़ों की लीपापोती करने की छूट इस PDS संचालक को किसने दी?

अब देखना यह होगा कि इस खबर के सामने आने के बाद जिला प्रशासन और खाद्य विभाग के आला अधिकारी नींद से जागकर निष्पक्ष जांच और भौतिक सत्यापन कराते हैं या फिर गरीबों के राशन की यह बंपर हेराफेरी फाइलों में ही दबा दी जाएगी।

KRISHNA MAHILANE

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