सरपंच-सचिव का फर्जीवाड़ा? खम्हारपाली पंचायत में रद्द GST नंबर पर लाखों का भुगतान।

सारंगढ़-बिलाईगढ़ – जिले के सारंगढ़ जनपद पंचायत सारंगढ़ अंतर्गत ग्राम पंचायत खम्हारपाली में शासकीय राशि के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पंचायत के विकास कार्यों में उपयोग किए गए बिलों और भुगतान संबंधी दस्तावेजों में ऐसे GST नंबर का उपयोग किए जाने का आरोप है, जो जीएसटी विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार पहले ही निरस्त हो चुका था।
प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार ग्राम पठारीपाली निवासी भोजराम पटेल की फर्म के GSTIN 22BTYPP2365P1ZR को जीएसटी पोर्टल में 12 जून 2024 से “Cancelled Suo-Moto” दर्शाया गया है। उपलब्ध GST रिकॉर्ड के अनुसार “Suo-Moto Cancellation” का अर्थ है कि कर विभाग ने स्वयं कार्रवाई करते हुए GST पंजीयन को निरस्त कर दिया था। निरस्त GSTIN की स्थिति में उसका उपयोग व्यापारिक एवं कर संबंधी गतिविधियों में सीमित या प्रतिबंधित हो सकता है।
निरस्त GST के बाद भी लगाए गए बिल?
आरोप है कि GST निरस्त होने के बाद भी ग्राम पंचायत खम्हारपाली में निर्माण सामग्री, साफ-सफाई कार्य, वाहन व्यवस्था तथा अन्य मदों के नाम पर उसी GST नंबर वाले बिलों के आधार पर भुगतान किए गए। कई बिलों में पंचायत की सील एवं संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के हस्ताक्षर भी बताए जा रहे हैं।
यदि जांच में यह तथ्य सही पाया जाता है कि निरस्त GST नंबर वाले बिलों के आधार पर भुगतान स्वीकृत और आहरित किए गए, तो यह मामला केवल लेखा त्रुटि नहीं बल्कि वित्तीय जवाबदेही और दस्तावेजों की वैधता से जुड़ा गंभीर विषय बन सकता है।
पंचायत और फर्म दोनों पर उठे सवाल
मामले में सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब GST नंबर निरस्त था तो—
बिल किस आधार पर जारी किए गए?
पंचायत स्तर पर बिलों का सत्यापन कैसे हुआ?
भुगतान स्वीकृत करने वाले अधिकारियों ने GST की वैधता की जांच की या नहीं?
ई-ग्राम स्वराज पोर्टल में भुगतान से पूर्व दस्तावेजों का परीक्षण हुआ या नहीं?
इन सवालों के जवाब अब जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे।
जांच और कार्रवाई की मांग
मामले को लेकर एसडीएम सारंगढ़ से शिकायत कर उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई है। शिकायत में संबंधित फर्म, पंचायत के जिम्मेदार पदाधिकारियों तथा भुगतान प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने, दोष सिद्ध होने पर कार्रवाई करने तथा शासकीय राशि की वसूली की मांग की गई है।
खम्हारपाली पंचायत में सामने आए इस कथित मामले ने स्थानीय स्तर पर चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। अब सभी की नजर प्रशासनिक जांच पर टिकी हुई है कि दस्तावेजों में दर्शाए गए तथ्यों की पुष्टि होती है या नहीं और जिम्मेदारी किसकी तय होती है।











