सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में निजी स्कूलों की मनमानी: बिलाईगढ़ के मंधाईभाठा स्थित ‘विनायक अकादमी’ के तुगलकी फरमान से अभिभावक परेशान, विभाग की चुप्पी पर उठ रहे सवाल!

सारंगढ़-बिलाईगढ़: – जिले के बिलाईगढ़ विकासखंड अंतर्गत मंधाईभाठा में संचालित निजी शिक्षण संस्थान ‘विनायक अकादमी’ (Vinayak Academy) इन दिनों अपनी मनमानी और अजीबोगरीब फरमानों को लेकर अभिभावकों के निशाने पर है। स्कूल प्रबंधन द्वारा सांस्कृतिक उत्सव के नाम पर छात्रों और उनके पालकों पर अनावश्यक आर्थिक और मानसिक दबाव बनाया जा रहा है, जिससे आम जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है।
मिजोरम की पोशाक और महंगे व्यंजनों का थोपा जा रहा दबाव
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आगामी सांस्कृतिक कार्यक्रमों की आड़ में स्कूल प्रशासन द्वारा पालकों पर भारी-भरकम खर्च का बोझ डाला जा रहा है। विद्यालय की ओर से जारी एक निर्देश के तहत कक्षा पहली (Class 1st 3st Rose) के मासूम बच्चों के लिए मिजोरम राज्य की पारंपरिक पोशाक (जैसे- पावा, पुआन, रिसाल, हेडबैंड और विशेष आभूषण) तथा मिजोरम के विशिष्ट व्यंजन (जैसे- बांस की शट, स्मोक्ड मीट आदि) अनिवार्य रूप से खरीदकर या तैयार करवाकर लाने का फरमान सुनाया गया है।
छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और स्थानीय परिवेश में इस प्रकार की बाहरी संस्कृतियों और विशिष्ट खान-पान की वस्तुओं को थोपने से अभिभावकों की जेब पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ रहा है, जिसे पूरा करना कई परिवारों के लिए बेहद मुश्किल साबित हो रहा है।
अभिभावकों में फूटा गुस्सा, मानसिक उत्पीड़न का आरोप
अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन द्वारा इस तरह के अव्यवहारिक और महंगे निर्देश आए दिन जारी किए जाते हैं। इससे न केवल नौनिहाल छात्र मानसिक रूप से प्रताड़ित हो रहे हैं, बल्कि पालक भी लगातार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। रोज-रोज की इन अनर्गल मांगों के कारण बच्चों का ध्यान पढ़ाई के बजाय दिखावे और बाहरी गतिविधियों पर केंद्रित हो रहा है, जिससे उनकी सामान्य शैक्षणिक गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
विभाग की चुप्पी और बिना आदेश के मनमानी
सबसे बड़ा सवाल यह है कि शिक्षा विभाग की ओर से इस प्रकार का कोई भी अनिवार्य दिशा-निर्देश जारी नहीं किया गया है, इसके बावजूद स्कूल संचालक द्वारा अपनी जिद और मनमानी पालकों पर थोपी जा रही है। क्षेत्रीय नागरिकों और जागरूक अभिभावकों ने कड़े शब्दों में सवाल उठाया है कि क्या निजी स्कूलों पर शिक्षा विभाग का कोई नियंत्रण नहीं बचा है? मनमाने तरीके से इस तरह के आदेश थमाने वाले संस्थानों पर लगाम कसने में जिम्मेदार अधिकारी क्यों नाकाम साबित हो रहे हैं?
कड़ी कार्रवाई की पुरजोर मांग
क्षेत्र के नागरिकों, जागरूक अभिभावकों और प्रबुद्धजनों ने जिला प्रशासन तथा जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने मांग की है कि ‘विनायक अकादमी’, मंधाईभाठा के इस तानाशाही रवैये की निष्पक्ष जांच की जाए और दोषी विद्यालय प्रबंधन के खिलाफ सख्त विभागीय एवं प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी छात्र और उसके परिवार का इस प्रकार आर्थिक व मानसिक शोषण न हो सके।
इस संबंध में स्कूल संचालक से फोन के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो पाया। उनका पक्ष मिलने के बाद उसे भी शामिल किया जाएगा।”







