मीडिया जगत खतरा नही, राष्ट्र की शक्ति है, मेरा निशाना सोशल मीडिया के भ्रामक साइबर वारफेयर पर था- संजय भूषण पांडेय

जि.पं. अध्यक्ष का संबोधन भ्रामक सोशल मीडिया के खिलाफ था, मुख्यधारा प्रेस के नहीं – एसडीओपी
सारंगढ़। शासकीय लोचन प्रसाद पाण्डेय महाविद्यालय में आयोजित ‘सैनिक एवं वीर सम्मान’ कार्यक्रम के दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष संजय भूषण पाण्डेय के संबोधन को लेकर फैली गलतफहमी पर अब पूरी तरह विराम लग गया है। पुलिस प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों और स्वयं जिला पंचायत अध्यक्ष के दो-टूक वक्तव्य के बाद यह शीशे की तरह साफ हो गया है कि उनका मंतव्य मुख्यधारा के पत्रकारों को लेकर नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोशल मीडिया के जरिए चलाए जा रहे छद्म साइबर युद्ध के खिलाफ था।
भाषण युवाओं को भ्रामक सोशल मीडिया से सचेत करने पर था- एसडीओपी
विवाद पर तथ्यों को सामने रखते हुए अनुविभागीय पुलिस अधिकारी गोविंद दीवान ने स्पष्ट किया कि पुलिस टीम कार्यक्रम में मौजूद थी संजय भूषण पाण्डेय का पूरा संबोधन आधुनिक दौर की सुरक्षा चुनौतियों पर केंद्रित था।
एसडीओपी ने बताया कि पुलिस प्रेस नोट के संक्षेपण के कारण शब्दों का संदर्भ गलत समझ लिया गया होगा । उन्होंने कहा संजय भूषण पाण्डेय ने अपने उद्बोधन में स्पष्ट तौर पर फेसबुक, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम जैसे अनियंत्रित डिजिटल मंचों पर युवाओं Gen-Z को भ्रमित करने वाली फेक न्यूज और विदेशी प्रोपेगैंडा से सतर्क रहने की सीख दी थी। उनका संकेत किसी भी रूप में निष्पक्ष व जिम्मेदार पत्रकारिता के विरुद्ध नहीं था। पुलिस विभाग ने भी अंत में यही संदेश दिया था कि सोशल मीडिया की अफवाहों से बचें। इसे मुख्यधारा की मीडिया से जोड़ना केवल संवादहीनता और गलतफहमी है।
पत्रकारिता लोकतंत्र की रीढ़, हमारे संबंध अटूट- संजय भूषण पाण्डेय
जिला पंचायत अध्यक्ष ने पत्रकारों के प्रति अपनी गहरी निष्ठा व्यक्त करते हुए कहा कि सारंगढ़ की मीडिया से उनका रिश्ता हमेशा आत्मीय, पारिवारिक और सम्मानजनक रहा है।
श्री पाण्डेय ने आगे कहा पत्रकार हमारे समाज का आईना और लोकतंत्र का सबसे मजबूत प्रहरी हैं। सारंगढ़ के सजग पत्रकारों ने हमेशा जनहित, विकास और सच्चाई को निर्भीकता से शासन-प्रशासन के सामने रखा है। सेवा संकल्प अभियान से लेकर जनसरोकार के हर कार्य को जनता तक मीडिया ने ही पहुंचाया है। कलम के सिपाहियों पर सवाल उठाने की मैं सपने में भी कल्पना नहीं कर सकता। मेरा दर्द सिर्फ उन असामाजिक और राष्ट्रविरोधी ताकतों को लेकर था, जो सोशल मीडिया के जरिए हमारे देश के ताने-बाने को चोट पहुंचा रहे हैं। पत्रकार बंधुओं का सम्मान मेरे लिए सदैव सर्वोच्च था और रहेगा, पत्रकार ही मेरे आइना हैँ अगर भविष्य क़भी इस तरह भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो तो बेझिझक मुझसे मेरा पक्ष जानने के सभी पत्रकार हकदार हैँ।




