खाद्य विभाग की सरपरस्ती में राशन का ‘महाघोटाला’? सारंगढ़-बिलाईगढ़ में PDS दुकानों में चावल डंप, फिर भी लगातार आवंटन जारी, स्टॉक रजिस्टर में भारी धांधली!

सारंगढ़-बिलाईगढ़:- जिले का खाद्य विभाग भ्रष्टाचार और अव्यवस्था का गढ़ बन चुका है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की दुकानों में सरकारी चावल का भारी स्टॉक डंप पड़ा हुआ है, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी बंद कमरों से नया राशन जारी करने का खेल खेल रहे हैं। यह महज एक प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि कागजों पर स्टॉक दिखाकर जमीनी स्तर पर राशन ठिकाने लगाने की एक ‘बड़ी धांधली’ की ओर इशारा कर रहा है।
दुकानों में ‘डंप माल’—
जिले भर की राशन दुकानों में बंपर चावल का स्टॉक भरा पड़ा है। हैरानी की बात यह है कि पिछले महीने का आवंटन पूरी तरह बिका या बंटा भी नहीं होता, और विभाग ने बिना भौतिक सत्यापन के फिर से चावल की नई खेप दुकानों में ठूंस दी जाती है। भौतिक स्टॉक और सरकारी फाइलों के आंकड़ों में भारी अंतर देखा जा रहा है। सूत्रों की मानें तो राशन दुकानों में चावल डंप दिखाकर इसे खुले बाजार में खपाने और कालाबाजारी करने का बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है, जिसमें विभाग की मौन सहमति साफ नजर आ रही है।
स्टॉक एंट्री में फर्जीवाड़ा, अधिकारियों की सरपरस्ती
नियमों के मुताबिक हर महीने दुकानों के पुराने स्टॉक का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) होना अनिवार्य है, ताकि यह पता चल सके कि कितना राशन बंटा और कितना शेष है। लेकिन सारंगढ़-बिलाईगढ़ में अधिकारी एसी दफ्तरों में बैठकर फर्जी रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। बिना जांच किए लगातार नया चावल जारी करना इस बात का सबूत है कि विभाग इस पूरी धांधली को ढकने और चहेते माफियाओं को फायदा पहुंचाने में जुटा है।
जनता के हक पर डाका और उठते तीखे सवाल:
जांच से परहेज क्यों? जब दुकानों में क्षमता से अधिक चावल पहले से पड़ा है, तो खाद्य अधिकारी दुकानों का निरीक्षण करने से क्यों कतरा रहे हैं?
धांधली की भरपाई कौन करेगा? स्टॉक के हेरफेर और कालाबाजारी से शासकीय राजस्व को जो लाखों-करोड़ों की चपत लग रही है, उसका जिम्मेदार कौन है?
कार्रवाई से डर किसका? गड़बड़ी की शिकायतें सामने आने के बाद भी जिला खाद्य अधिकारी ने अब तक किसी दोषी पर कार्रवाई क्यों नहीं की?
सारंगढ़-बिलाईगढ़ की जनता अब यह सवाल पूछ रही है कि क्या जिला प्रशासन इस गठजोड़ और फर्जीवाड़े पर कोई कठोर कार्यवाही करेगा, या खाद्य विभाग की यह समानांतर ‘धांधली यूं ही गरीबों का निवाला बेचकर अपनी जेबें भरती रहेगी?




