सारंगढ़ के हृदय स्थल पर संकट: बिना टेंडर और परमिशन के गढ़चौक के पास फ्लाई एश की अवैध डंपिंग, नियमों को ठेंगा दिखा रहे रसूखदार ट्रांसपोर्टर।

सारंगढ़-बिलाईगढ़। सारंगढ़ शहर के सबसे व्यस्त और हृदय स्थल माने जाने वाले गढ़चौक के पास नियमों की धज्जियां उड़ाने का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ नान ऑफिस (नान कार्यालय) के ठीक बगल में भारी मात्रा में फ्लाई एश (राखड़) की अवैध डंपिंग धड़ल्ले से की जा रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस कृत्य के लिए न तो प्रशासन से कोई परमिशन (अनुमति) ली गई है और न ही किसी प्रकार का टेंडर जारी हुआ है। बिना किसी डर और वैधानिक प्रक्रिया के, शहर के बीचों-बीच चल रहा यह खेल प्रशासनिक मुस्तैदी पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

लापरवाह ट्रांसपोर्टर की मनमानी, जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़
मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे अवैध डंपिंग के खेल के पीछे एक रसूखदार ट्रांसपोर्टर का हाथ बताया जा रहा है। चंद रुपयों के मुनाफे और ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट (परिवहन लागत) बचाने के चक्कर में नियमों को ताक पर रखकर रात-दिन यहाँ राखड़ गिराया जा रहा है। नियमतः फ्लाई एश के निस्तारण और डंपिंग के लिए कड़े पर्यावरण गाइडलाइंस का पालन करना अनिवार्य होता है, लेकिन संबंधित ट्रांसपोर्टर बेखौफ होकर रिहायशी इलाके के पास इस जानलेवा डस्ट को डंप कर रहा है।
आस-पास का वातावरण प्रभावित, मंडरा रहा बीमारियों का खतरा
गढ़चौक और नान ऑफिस के आस-पास का क्षेत्र काफी व्यस्त रहता है। यहाँ रोजाना हजारों लोगों की आवाजाही होती है, साथ ही घनी आबादी भी बसी हुई है। फ्लाई एश की इस अवैध डंपिंग के कारण हवा में बारीक धूल के कण (Particulate Matter) घुल रहे हैं।
प्रदूषण का ग्राफ बढ़ा: थोड़ी सी भी हवा चलने पर पूरी राखड़ उड़कर आस-पास के घरों, दुकानों और राहगीरों के चेहरे पर जा रही है।
स्वास्थ्य को गंभीर खतरा: पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, फ्लाई एश के कण सांस के जरिए फेफड़ों में जाकर दमा, ब्रोंकाइटिस और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों को दावत देते हैं।
प्रशासन मौन क्यों? जनता पूछ रही सवाल
शहर के बीचों-बीच बिना किसी एनओसी (NOC) और बिना टेंडर के इतनी बड़ी मात्रा में फ्लाई एश डंप कर दिया गया, लेकिन स्थानीय प्रशासन और पर्यावरण विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी? या फिर जानकर भी अनजान बना जा रहा है? स्थानीय नागरिकों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है।
नागरिकों का कहना है “अगर जल्द ही इस अवैध डंपिंग को यहाँ से नहीं हटाया गया और संबंधित ट्रांसपोर्टर पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो क्षेत्र की जनता उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी।”
अब देखना यह है कि इस गंभीर और संवेदनशील मामले पर सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड क्या एक्शन लेता है, या फिर इस ट्रांसपोर्टर की मनमानी के आगे आम जनता यूँ ही घुट-घुट कर जीने को मजबूर रहेगी।




