ई-ग्राम स्वराज में ‘कागजी लूट’: कैंसिल GST पर पास हुए लाखों के बिल, बिलाईगढ़ में ‘मां चन्द्रहासिनी ट्रेडर्स’ बेनकाब!

सारंगढ़-बिलाईगढ़। जनपद पंचायत बिलाईगढ़ की ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर शासकीय धन का खुलेआम दुरुपयोग और भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है। मनरेगा और 15वें वित्त आयोग जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं में बिना किसी वास्तविक सामग्री आपूर्ति के लाखों रुपये के फर्जी बिल लगाकर सरकारी राशि का धड़ल्ले से आहरण किया जा रहा है।
मिली जानकारी और सबूतों के अनुसार, ग्राम पंचायतों में ‘माँ चन्द्रहासिनी ट्रेडर्स’ (मेन रोड गोविंदवन, बिलाईगढ़) के नाम से जारी कोटेशन और बिल लगाए जा रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस वेंडर का GSTIN (22COUPD2062K1ZW) कथित तौर पर अमान्य या कैंसिल बताया जा रहा है, इसके बावजूद ई-ग्राम स्वराज (eGramSwaraj) और अन्य शासकीय पोर्टल पर इसके बिल धड़ल्ले से अपलोड कर भुगतान लिया जा रहा है।
सामग्री नदारद, सिर्फ कागजों पर हो रहा लाखों का विकास
ग्राम पंचायत अमलीडीहा और ग्राम पंचायत भंडोरा (बिल क्र. 942, दिनांक 18/03/26) जैसी कई पंचायतों में सीमेंट, रेती, चूना, तार, प्लास्टिक शीट और थर्माकोल जैसी निर्माण सामग्रियों के नाम पर 15,000 से लेकर 1,00,000 रुपये तक के बड़े-बड़े बिल लगाए गए हैं। स्थानीय सूत्रों का आरोप है कि धरातल पर कोई भी सामग्री नहीं पहुंची है और केवल कागजी खानापूर्ति कर भ्रष्टाचार के इस खेल को अंजाम दिया जा रहा है।
प्रशासनिक मिलीभगत पर उठे सवाल!
बिना भौतिक सत्यापन और फर्जी/कैंसिल्ड GST नंबर वाले बिलों का पोर्टल पर स्वीकृत होना प्रशासनिक अधिकारियों व तकनीकी अमले की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या बिना जिम्मेदार अधिकारियों की शह के यह फर्जीवाड़ा संभव है?
उजागर हुई अनियमितताएं:
फर्जी GST नंबर का इस्तेमाल:-अमान्य या रद्द GSTIN के साथ वेंडर के बिलों का भुगतान के लिए उपयोग।
कागजों तक सीमित सामग्री:- रेती, चूना, सीमेंट जैसी सामग्रियों के भारी-भरकम बिल, लेकिन धरातल पर काम शून्य।
शासकीय मदों में सेंधमार:- मनरेगा और 15वें वित्त आयोग की राशि का योजनाबद्ध आहरण।
जागरूक नागरिकों ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच करने, दोषियों पर एफआईआर (FIR) दर्ज करने और गबन की गई राशि की रिकवरी की बात कही है अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस बड़े खुलासे के बाद क्या कार्रवाई करता है या मामला यूं ही ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।







