सारंगढ

सारंगढ़ के ‘जन-कलेक्टर’ संजय कन्नौजे, सक्रियता से बदली जिले की तस्वीर…

सारंगढ़-बिलाईगढ़। छत्तीसगढ़ के नवगठित जिलों में शुमार सारंगढ़-बिलाईगढ़ में इन दिनों एक नई प्रशासनिक कार्यसंस्कृति चर्चा का केंद्र बनी हुई है। जिले के कलेक्टर श्री संजय कन्नौजे ने अपने व्यवहार और विकास कार्यों के अनूठे तालमेल से जनता के बीच एक अमिट छाप छोड़ी है। जहां एक ओर उनकी सादगी की मिसालें दी जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर जिले के बुनियादी ढांचे में आए बदलाव उनके विजन को बयां कर रहे हैं।

वीआईपी कल्चर को ठेंगा: आम आदमी की तरह जीवन-

सारंगढ़ की जनता उस वक्त आश्चर्यचकित रह जाती है जब वह जिले के सर्वोच्च अधिकारी को बिना किसी प्रोटोकॉल के सड़कों पर देखती है।

पिता का दायित्व-

कलेक्टर श्री कन्नौजे को अक्सर अपने बच्चों को खुद स्कूल छोड़ते हुए देखा जाता है। किसी तामझाम के बिना एक पिता के रूप में उनकी यह भूमिका सोशल मीडिया से लेकर चौक-चौराहों तक सराहना बटोर रही है।

बाजारों में सहज उपस्थिति-

दुकानों में जाकर खुद खरीदारी करना और आम आदमी की तरह पैदल सड़कों पर घूमना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। जनता के लिए एक IAS अधिकारी को इतना करीब और सहज देखना किसी सुखद आश्चर्य से कम नहीं है।

विकास का ‘सारंगढ़ मॉडल’-

सादगी के साथ-साथ श्री कन्नौजे का प्रशासनिक चाबुक भी उतना ही प्रभावी है। उन्होंने जिले की वर्षों पुरानी समस्याओं को जड़ से खत्म करने का बीड़ा उठाया है।

सड़क और कनेक्टिविटी-

कलेक्टर की विशेष पहल से जिले की मुख्य सड़कों और पहुंच मार्गों का तेजी से नवीनीकरण हुआ है। जर्जर सड़कों की जगह अब सुगम आवागमन ने ले ली है।

बिजली व्यवस्था में व्यापक सुधार-

बिजली की समस्या से जूझ रहे ग्रामीण अंचलों में अधोसंरचना मजबूत की गई है, जिससे अब अघोषित कटौती और लो-वोल्टेज जैसी समस्याओं में भारी कमी आई है।

प्रतीक्षालयों का निर्माण- मुसाफिरों की सुविधा के लिए बस स्टैंड मे आधुनिक और सुविधायुक्त यात्री प्रतीक्षालयों का निर्माण उनकी दूरदर्शी सोच का परिणाम है। अब आम नागरिकों को बस और वाहनों के इंतजार में सड़कों पर खड़ा नहीं होना पड़ता।

जनता की आवाज: “पहली बार देखा ऐसा प्रशासक”-

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि उन्होंने जिले में कई अधिकारी देखे, लेकिन श्री संजय कन्नौजे ने प्रशासन और जनता के बीच की दूरी को खत्म कर दिया है। उनकी कार्यशैली ने सिद्ध कर दिया है कि एक अधिकारी यदि जमीन से जुड़ा हो, तो सरकारी योजनाएं और विकास कार्य सीधे अंतिम व्यक्ति तक पहुँचते हैं।
“जब कलेक्टर खुद सड़कों पर उतरकर व्यवस्था देखें और आम आदमी की तरह बाजार में मिलें, तो समझ लीजिए कि जिला सही हाथों में है। उन्होंने न केवल सड़कें बनाईं, बल्कि जनता का विश्वास भी जीता है।” — सारंगढ़ के प्रबुद्ध नागरिकों का कथन

निष्कर्ष-
कलेक्टर संजय कन्नौजे की यह दोहरी भूमिका—एक संवेदनशील पिता/नागरिक और एक सख्त प्रशासक—आज पूरे छत्तीसगढ़ में एक मिसाल बन रही है। उनके नेतृत्व में सारंगढ़-बिलाईगढ़ न केवल विकास की दौड़ में आगे बढ़ रहा है, बल्कि ‘सुशासन’ की नई परिभाषा भी लिख रहा है।

KRISHNA MAHILANE

EDITOR IN CHIEF https://teekhi-mirchi.com CONTACT US- 6260567537

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