सरकारी फंड में सेंधमारी पड़ गई भारी: छातादेई के तत्कालीन सरपंच व सचिव से होगी 3 लाख 14 हजार की वसूली!

पत्नी को ‘फर्जी वेंडर’ बना गपचप कर गए सरकारी पैसा: छतादेई के पूर्व सरपंच और सचिव पर गिरेगी रिकवरी की गाज!
सारंगढ़-बिलाईगढ़ |विकास के नाम पर सरकारी खजाने में किस कदर सेंध लगाई जाती है, इसका एक और काला कारनामा सारंगढ़ के ग्राम पंचायत छातादेई में उजागर हुआ है। तत्कालीन सरपंच ने अपने पद का रसूख दिखाते हुए अपनी ही पत्नी के नाम से फर्जी वेंडर तैयार किया और पंचायत के लाखों रुपयों पर हाथ साफ कर दिया।
लेकिन कहते हैं न, ‘पाप का घड़ा एक न एक दिन भरता जरूर है’— इस मामले में जांच रिपोर्ट आते ही हड़कंप मच गया है। जिला पंचायत सीईओ ने कड़ा रुख अपनाते हुए धारा 92 के तहत कड़े एक्शन के आदेश जारी कर दिए हैं।
क्या है पूरा फर्जीवाड़ा?
मामला ग्राम पंचायत छातादेई (जनपद पंचायत सारंगढ़) का है। ग्रामीण रमेश कुमार ने ‘जनदर्शन’ में शिकायत दर्ज कराई थी कि तत्कालीन सरपंच विजय (विक्की) पटेल ने अपनी पत्नी के नाम पर फर्जी वेंडर बनाकर पंचायत के सरकारी फंड का अवैध आहरण कर लिया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए 19 जनवरी 2026 को 3 सदस्यीय जांच टीम का गठन किया गया था। जांच टीम ने जब ऑनलाइन मटीरियल रजिस्टर, पेमेंट रिपोर्ट और पेमेंट ऑर्डर रिपोर्ट की परतें खंगालीं, तो फर्जीवाड़े का भांडा फोड़ गया। जांच रिपोर्ट में साफ हुआ कि….
यह कोई वास्तविक भुगतान नहीं था।
छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 40 (1) (क) के स्पष्टीकरण (ग) को दरकिनार कर सरपंच ने अपने ही रिश्तेदार (पत्नी) को गलत तरीके से भुगतान किया।
₹3.14 लाख की होगी वसूली: दोनों पर गाज
जांच रिपोर्ट के आधार पर कुल ₹3,14,000 (तीन लाख चौदह हजार रुपये) का फर्जीवाड़ा साबित हुआ है। इस राशि की भरपाई के लिए जिला पंचायत सीईओ ने तत्कालीन सरपंच और तत्कालीन सचिव दोनों को समान रूप से जिम्मेदार ठहराया है:
1. तत्कालीन सचिव (श्री विरेंद्र सिदार): इनसे बकाया आधा हिस्सा 1,57,000 उनके वेतन से कटौती कर वसूला जाएगा।
2. तत्कालीन सरपंच (श्री विजय ‘विक्की’ पटेल): इनसे बकाया आधा हिस्सा 1,57,000 वसूलने के लिए अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व/SDM) सारंगढ़ को छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 92 के तहत प्रकरण दर्ज कर सख्त रिकवरी कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।
प्रशासन का सख्त संदेश:
सरकारी खजाने को अपनी निजी तिजोरी समझने वालों के लिए यह एक बड़ा सबक है। जिला पंचायत सारंगढ़-बिलाईगढ़ की इस कड़ी कार्रवाई से भ्रष्टाचार करने वाले जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों में खलबली मच गई है!





