सारंगढ़ जनपद में लापरवाही, 362 निर्माण कार्य अधर में,सरकारी खजाने का बंदरबांट या अफसरों की नाकामी?

सारंगढ़-बिलाईगढ़ / सारंगढ़ जनपद पंचायत में विकास कार्यों का जो हाल है, उसे देखकर यही लगता है कि सरकारी पैसों को ‘अपनी बपौती’ समझकर कागजों पर ही विकास की गंगा बहाई जा रही है। जो सूची सामने आई है, वह किसी महा-लापरवाही से कम नहीं है। कुल 362 निर्माण कार्य अधर में लटके पड़े हैं और जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद में सो रहे हैं!
नाली, सड़क, पानी सब ठप: कहाँ गायब हुई करोड़ों की राशि?
DMF, गौण खनिज, 15वें वित्त, विधायक मद और राज्य आपदा जैसी बड़ी योजनाओं से करोड़ों रुपये की स्वीकृति मिली। लेकिन धरातल पर सच्चाई क्या है?
‘अप्रतिबद्ध’ और केवल कागजी आदेश: – दर्जनों बोर खनन, सीसी रोड, नाली और शेड निर्माण के नाम पर सिर्फ “सामग्री एकत्रीकरण” और “कार्यादेश जारी” का ड्रामा चल रहा है।
पीने के पानी पर ताला:- पानी टैंकर क्रय और बोर खनन के कार्य महीनों से धूल फांक रहे हैं। जनता पानी के बूंद-बूंद को तरस रही है और अफसर एसी कमरों में बैठकर फाइलें दबाए बैठे हैं।
समयसीमा खत्म, पर काम ‘ज़ीरो‘:- अधिकांश कार्यों की पूर्णता तिथि सिर पर है या बीत चुकी है, लेकिन काम अभी ‘अप्रारंभ’ की श्रेणी में दर्ज है।
इंजीनियरों की कारगुजारी: क्या बिना कमीशन के नहीं हिलती फाइल?
सूची में साफ दिख रहा है कि उप-अभियंता (Engineers)—दिनेश नायक, नागेंद्र निराला, गिरवर चंद्राकर और बी.के. गुप्ता के प्रभार वाले क्षेत्रों में काम की रफ्तार रेंग रही है।
क्या इंजीनियर साहबान को ठेकेदारों से ‘सेटिंग’ करने में फुर्सत नहीं मिल रही?
या फिर जिला प्रशासन और जनपद सीईओ की शह पर यह पूरा खेल खेला जा रहा है?
जब जनता अपने हक़ के लिए जनपद कार्यालय के चक्कर काटती है, तो उन्हें गोल-मोल जवाब देकर टाल दिया जाता है।
सारंगढ़ की जनता अब यह पूछ रही है कि…
1. जब राशि स्वीकृत हो चुकी है, अग्रिम राशि आहरण हो चूका है,कई महीनो बीत जाने के बाद भी,तो काम शुरू क्यों नहीं हुआ?
2. क्या बिना काम किए ही राशि का आहरण (विड्रॉल) करने की साजिश रची जा रही है?
यदि जिला कलेक्टर और शीर्ष प्रशासन द्वारा इन 362 अपूर्ण विकास कार्यों की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, तो जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका स्पष्ट हो सकती है। ऐसे में प्रशासन के लिए लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर जवाबदेही तय करते हुए आवश्यक कार्रवाई करना जरूरी दिखाई देता है।
अब देखना यह है कि इस खबर के बाद जिम्मेदार अधिकारियों की नींद टूटती है या वे हमेशा की तरह बहानों की ढाल बनाएंगे।




