बिलाईगढ़

खनन माफिया देवेंद्र साहु बिना लीज के चला रहें हैं अवैध खदान।

सारंगढ़ बिलाइगढ़ – बिलाईगढ़ ब्लाक के आसपास का पथरीला इलाका अवैध कारोबारियों के लिए सोने की खान साबित हो रहा है। राजनीतिक संरक्षण में ठेकेदार बेखौफ होकर अवैध उत्खनन मनमाने ढंग से खनिज संपदा का दोहन कर रहे हैं। वहीं खदानों में लगातार ब्लास्टिंग से ग्रामीणों को परेशानी और नुकसान उठाना पड़ रहा। जानकारी के अनुसार ग्राम पंचातय छपोरा बेलटिकरी में अवैध पत्थर खदानें है।

जहां रोजाना सुबह 6 बजे से ब्लास्टिंग शुरू हो जाती है। खदान मालिक देवेंद्र साहू का हौसला इस कदर बुलंद है, वे छुट्‌टी के दिन भी विस्फोट करने से नहीं चूकते। नियम यह है कि खदानों में विस्फोट का काम लाइसेंसी कर्मचारियों द्वारा किया जाए। लेकिन क्षेत्र के खदानों में मजदूरों और अप्रशिक्षित लोगों से ही यह काम कराया जा रहा। क्षेत्र के ग्रामीण इस अवैध कार्य की शिकायत करने से भी डरते है क्योंकि खनन माफ़ीया देवेंद्र साहू का दबाव ग्रामीणों पर हमेशा बना रहता है..दूसरी ओर,वहीं बिलाईगढ़ क्षेत्र में रोड पर क्रशर की डस्ट राहगीरों के लिए परेशानियों का सबब बन गई है।

नही है ली गई है खदान के लिए कोई भी लीज

खदान मालिक देवेंद्र साहू का हौसला इस कदर बढ़ा हुआ है कि नियम कायदा क़ानून को ताक पर रख कर बिना लीज, रायल्टी का पत्थर खदान धड़ल्ले से चला रहा है आपको बता दें रोजाना 100 से 200 ट्रिप पत्थर इनके द्वारा बेचा जाता है खनीज विभाग के आँखों पर धूल झोक कर सारा काम किया जा रहा है

बिलाईगढ़ ब्लाक के गांवों में पत्थर खदानों का संचालन में नियमों का पालन नहीं हो रहा।

थानों में अक्सर नहीं दी जाती जानकारी, चल रही मनमानी ढंग से अवैध खदान
सवाल यह है कि खदान मालिक देवेंद्र साहू को अवैध विस्फोट के लिए विस्फोटक सामग्री कहां से और कैसे मिल रही है। यह इस बात का संकेत है कि खदानों में विस्फोट के लिए प्रयुक्त किए जाने वाले डेटोनेटर व केप जैसे संवेदनशील सामान अवैध तरीके से लाए जा रहे। 60 से अधिक क्रशर और चुना पत्थर खदान है। इस पर आवागमन कितना जोखिम भरा है, इसका अनुमान लगाया जा सकता है।कि ग्रामीणों के स्वाशथ्य पर हमेशा खिलवाड़ किया जा रहा है

बारिश का पानी नहीं ठहर पाता खेतों को हो रहा नुकसान
क्षेत्र में खदानों के विस्तार से किसानों के लिए परेशानी खड़ी हो रही है। बारिश के दिनों में संबंधित गांवों में पानी रुकता नहीं। आसपास की खदानें खेतों का पानी सोख लेती है। इस वजह से सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध नहीं हो पाता। ग्राम पंचायत की सीमा में खदान चलाने के लिए पंचायत की अनुमति जरूरी है। पर इसमें नियम कायदे का कहीं पालन नहीं हो रहा है। बारिश के दिनों में खेतों में पानी नहीं रुक पाने के कारण उत्पादन कम होता गया और किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा।

KRISHNA MAHILANE

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