गीता ट्रेडर्स के कैंसिल जीएसटी बिल पर 15वें वित्त आयोग की राशि हुआ आहरण।

सारंगढ़-बिलाईगढ़ – जिले में एक बार फिर शासन की महत्वाकांक्षी योजनाओं और जनता के खून-पसीने की गाढ़ी कमाई से मिलने वाले राजस्व के खुलेआम दुरुपयोग का मामला सामने आया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत स्तर पर संचालित विकास कार्यों और 15वें वित्त आयोग (15th Finance Commission) की अनुशंसित अनुदान राशि के भुगतान में बड़े पैमाने पर वित्तीय फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। आरोप है कि ‘गीता ट्रेडर्स‘ नामक फर्म द्वारा कैंसिल (निरस्त) हो चुके जीएसटी बिलों के आधार पर लाखों रुपये की राशि का आहरण किया जा रहा है।
यह कृत्य न केवल वैधानिक नियमों का खुला उल्लंघन है, बल्कि शासकीय राजकोष को सीधे तौर पर भारी आर्थिक क्षति पहुँचाने का गंभीर आपराधिक कृत्य भी है, जो विभागीय मिलीभगत और गहरी प्रशासनिक अनियमितता को उजागर करता है।
क्या है पूरा मामला और विधिक उल्लंघन?
जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) नियमों के अनुसार, किसी भी अधिकृत फर्म या व्यापारी का जीएसटी नंबर यदि रद्द (Cancelled) कर दिया जाता है, तो वह फर्म वैध रूप से किसी भी प्रकार के व्यावसायिक लेनदेन, कर संग्रहण या शासकीय आपूर्ति के बिल जारी करने के लिए अधिकृत नहीं रहती है। इसके बावजूद, 15वें वित्त आयोग जैसी महत्वपूर्ण और महत्वाकांक्षी योजना के तहत आने वाले विकास फंड से रद्द जीएसटी बिलों के माध्यम से भुगतानों का पास होना निम्नलिखित गंभीर कानूनों और नियमों के विरुद्ध है:
केंद्रीय वस्तु और सेवा कर अधिनियम, 2017 (CGST Act, 2017) का उल्लंघन:
रद्द किए गए जीएसटी नंबर के अंतर्गत बिल जारी करना और उसके आधार पर भुगतान प्राप्त करना जीएसटी अधिनियम की धारा 29 एवं संबंधित प्रावधानों के अंतर्गत अवैध व्यापारिक गतिविधियों की श्रेणी में आता है।
भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम:
शासकीय धन का दुरुपयोग कर अपात्र या फर्जी दस्तावेजों (कैंसिल बिल) के आधार पर आहरण करना लोक सेवकों और संबंधित फर्म संचालकों की मिलीभगत से धोखाधड़ी (Fraud), कूटसाक्षीकरण (Forgery) और गबन (Embezzlement) के दायरे को आकर्षित करता है।
वित्तीय संहिता और लोक निधि नियमों का उल्लंघन:
पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास विभाग के वित्तीय नियमों के अनुसार, किसी भी कार्य के देयकों का भुगतान करने से पूर्व बिल की पूर्ण वैधानिकता, जीएसटी पोर्टल पर उसकी सक्रियता (Active status) और कर अनुपालन की जांच करना संबंधित आहरण एवं संवितरण अधिकारी (DDO / सचिव / सरपंच) का प्राथमिक दायित्व है। इसकी अनदेखी वित्तीय अनुशासनहीनता को दर्शाती है।
राजस्व को क्षति और महत्वाकांक्षी योजनाओं पर सवाल
15वें वित्त आयोग की राशि का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे, स्वच्छता, पेयजल और स्थानीय प्राथमिकताओं के विकास को गति देना है। लेकिन यदि इन फंड्स का उपयोग फर्जी या अमान्य बिलों के जरिए बंदरबांट करने में किया जाएगा, तो इससे न केवल ग्रामीण विकास की रफ्तार थमेगी, बल्कि सरकार के पारदर्शी शासन के दावों को भी गहरी ठेस पहुंचेगी। कैंसिल जीएसटी बिलों पर भुगतान होने से शासन को मिलने वाले कर राजस्व (Tax Revenue) की भी अपूरणीय क्षति हो रही है।
जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग
इस प्रकार के गंभीर प्रकरण में स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक अमले की भूमिका संदेहास्पद प्रतीत होती है। यदि समय रहते इस वित्तीय अनियमितता की उच्च स्तरीय जांच नहीं की गई, तो यह भ्रष्टाचार को खुला संरक्षण देने के समान होगा।
क्षेत्र के प्रबुद्धजनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मामले में जिला प्रशासन और राज्य शासन से त्वरित संज्ञान लेने की मांग की है:
उच्च स्तरीय जांच दल का गठन: ‘गीता ट्रेडर्स’ द्वारा अब तक 15वें वित्त आयोग के तहत किए गए सभी भुगतानों और संबंधित बिलों की जीएसटी पोर्टल के माध्यम से फॉरेंसिक ऑडिट कराई जाए।
संबंधितों पर आपराधिक प्रकरण: फर्जी और कैंसिल बिलों को प्रमाणित कर शासकीय राशि आहरण करने वाले आहरण अधिकारियों, पंचायत पदाधिकारियों और फर्म संचालक के विरुद्ध कठोर दंडात्मक व कानूनी कार्रवाई की जाए।
राजस्व वसूली: शासकीय कोष को पहुंचाई गई क्षति की भरपाई संबंधित दोषियों से ब्याज सहित वसूली जाए।
इस विषय पर जल्द ही जिला सहायक आयुक्त GST विभाग को शिकायत किया जाएगा।
यह समाचार क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। इस पर आगे की अपडेट्स के लिए जुड़े रहें।








