खाद्य विभाग की मेहरबानी या मिलीभगत?सारंगढ़ में पीडीएस चावल का बड़ा ‘कागजी खेल’:ऑनलाइन पोर्टल पर स्टॉक फुल, जमीन पर दुकानें खाली;

सारंगढ़ बिलाईगढ़। जिले के सारंगढ़ विकासखंड में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत शासकीय उचित मूल्य दुकानों में एक बड़े फर्जीवाड़े और गंभीर अनियमितता की आशंका गहराती जा रही है। खाद्य विभाग के आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल पर जहां दुकानों के स्टॉक में सैकड़ों क्विंटल चावल लबालब दिखाई दे रहा है, वहीं जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। जमीनी स्तर पर राशन दुकानों से चावल गायब है और गरीब हितग्राही दाने-दाने को तरस रहे हैं।
ऑनलाइन 300 क्विंटल, जमीन पर सन्नाटा
खाद्य विभाग की वेबसाइट पर आंकड़े देखें तो सारंगढ़ विकासखंड की अधिकांश राशन दुकानों के पास 250 से 300 क्विंटल तक चावल का भारी स्टॉक मौजूद दर्ज है। लेकिन यदि इन पीडीएस दुकानों में जाकर भौतिक सत्यापन किया जाए, तो गोदामों में चावल की एक बोरी तक नजर नहीं आती। सवाल यह उठता है कि जब दुकानों में भौतिक रूप से राशन उपलब्ध ही नहीं है, तो फिर पोर्टल पर यह ‘कागजी स्टॉक’ किसके इशारे पर और क्यों दिखाया जा रहा है?
क्या जिम्मेदार अधिकारियों की है मौन सहमति?
नियमानुसार, यदि किसी दुकान में पहले से भारी मात्रा में राशन सरप्लस (स्टॉक) में दर्ज है, तो अगले आवंटन में कटौती की जानी चाहिए। लेकिन सारंगढ़ में खाद्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इस भारी विसंगति पर आंखें मूंदे बैठे हैं। कटौती करने के बजाय दुकानों को लगातार नया चावल आवंटित और सप्लाई किया जा रहा है।
यह पूरी कार्यप्रणाली अधिकारियों और राशन माफियाओं की मिलीभगत की ओर सीधा इशारा करती है। आशंका जताई जा रही है कि पोर्टल पर फर्जी एंट्री दिखाकर और कागजों में स्टॉक दर्ज रखकर खुले बाजार में राशन की कालाबाजारी की जा रही है।
सरकार द्वारा गरीबों के लिए भेजा जाने वाला राशन आखिर किसकी जेब में जा रहा है? ऑनलाइन और ऑफलाइन आंकड़ों का यह बड़ा अंतर केवल लापरवाही नहीं, बल्कि गरीबों के पेट पर सीधा डाका है। यदि मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कर दुकानों का भौतिक सत्यापन कराया जाए, तो कई चौकाने वाले खुलासे और लाखों रुपये के चावल घोटाले की परतें खुल सकती हैं।




