15वें वित्त की राशि पर ‘नीलेश ट्रेडर्स’ का डाका! बिना सप्लाई के पंचायतों में खपे बिल, कागजों में बंट रही गिट्टी-सीमेंट; सारंगढ़ में विकास पूरी तरह ठप!

नीलेश ट्रेडर्स का ‘बिलिंग सिंडिकेट’: कागजों में निर्माण, जेब में पैसा, गांव में विकास शून्य!
कागजों में बह रही विकास की धारा! नीलेश ट्रेडर्स के ‘फर्जी बिलों’ के सहारे सारंगढ़ में सरकारी खजाने में सेंध!
सारंगढ़-बिलाईगढ़ : – ग्राम पंचायतों के बुनियादी विकास और मूलभूत सुविधाओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा भेजी जाने वाली 15वें वित्त आयोग (15th Finance Commission) की राशि पर सारंगढ़ में भ्रष्टाचार का ग्रहण लग चुका है। जनपद पंचायत सारंगढ़ की कई ग्राम पंचायतों में सरकारी खजाने को चूना लगाने का एक बड़ा ‘कागजी सिंडिकेट’ सक्रिय है। पंचायतों में विकास कार्य धरातल पर दिखें या न दिखें, लेकिन नीलेश ट्रेडर्स’ के नाम से फर्जी बिल परोसकर शासकीय राशि का धड़ल्ले से बंदरबांट किया जा रहा है।
कागजों में बह रही विकास की नदियां,धरातल पर शून्य!
सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, 15वें वित्त आयोग की राशि का आहरण करने के लिए सरपंचों और सचिवों को ‘नीलेश ट्रेडर्स’ अचानकपाली, द्वारा धड़ाधड़ फर्जी बिल थमाए जा रहे हैं। बिलों में सीमेंट, गिट्टी, रेत और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी निर्माण सामग्रियों की आपूर्ति दर्ज की जा रही है।
लेकिन धरातल का सच इसके बिल्कुल विपरीत है— आशंका जताई जा रही है कि नीलेश ट्रेडर्स द्वारा वास्तव में पंचायतों को ₹1 का भी सामान या सामग्री मुहैया नहीं कराई गई है। ट्रेडर्स सिर्फ “बिल फाड़ने” की मशीन बना हुआ है और सरपंचों को राशि आहरण (Withdrawal) करने का एक आसान जरिया दे रहा है।
बिना सामान के भुगतान: नीलेश ट्रेडर्स सिर्फ कागजी बिल तैयार कर सरपंचों को देता है।
सरकारी खाते से राशि साफ: सरपंच और सचिव इन बिलों के आधार पर 15वें वित्त आयोग की राशि अपने चहेते ट्रेडर्स के खाते में ट्रांसफर कर आहरण कर लेते हैं।
विकास कार्य ठप: जब पंचायतों के पास गिट्टी, रेत और सीमेंट जैसी बुनियादी सामग्री पहुंचेगी ही नहीं, तो गांव में नाली, सीसी रोड, पेयजल या अन्य मूलभूत सुविधाओं के काम कहां से होंगे?
सवाल: क्या नीलेश ट्रेडर्स सिर्फ एक सप्लायर है, या फिर ग्राम पंचायतों की गाढ़ी कमाई को डकारने के लिए खड़ा किया गया एक कागजी ढांचा?”
जांच की उठी मांग
15वें वित्त आयोग की गाढ़ी कमाई को इस तरह से बिना काम किए डकार जाने से ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों में भारी आक्रोश पनप रहा है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि यह जनता के अधिकारों और शासकीय धन की खुली डकैती है।
प्रशासन से सीधी मांग:
1. स्थल निरीक्षण– नीलेश ट्रेडर्स द्वारा जिन-जिन पंचायतों में बिल लगाए गए हैं, वहां निर्माण कार्यों और सामग्रियों का निष्पक्ष Physical Verificationकराया जाए।
2.जीएसटी और स्टॉक की जांच: नीलेश ट्रेडर्स के जीएसटी रिटर्न और गोदाम के स्टॉक की जांच की जाए कि क्या वास्तव में उनके पास उतनी सामग्री की खरीदी और बिक्री का रिकॉर्ड है भी या नहीं?
3. FIR और ब्लैकलिस्ट की कार्रवाई: दोष सिद्ध होने पर नीलेश ट्रेडर्स को तत्काल प्रभाव से ब्लैकलिस्ट किया जाए और फर्जीवाड़े में शामिल ट्रेडर्स संचालक पर FIR किया जाए
अब देखना यह होगा कि सारंगढ़-बिलाईगढ़ का जिला प्रशासन इस ‘कागजी खेल’ पर कब तक नकेल कसता है, या फिर नीलेश ट्रेडर्स के फर्जी बिलों के सहारे 15वें वित्त की राशि यूं ही रसूखदारों की जेब में समाती रहेगी!




