आत्मानंद स्कूल गोड़म के प्राचार्य का कैमरे पर बड़ा विस्फोट—”सरकार की मंशा है कि गरीब के बच्चे पढ़ ही न पाएं!

सारंगढ़-बिलाईगढ़ में शिक्षा व्यवस्था का जनाजा: 9वीं से 60 बच्चे हुए पास, तो बाहर से सिर्फ 6 को मिलेगा दाखिला; वीडियो वायरल होने से मचा हड़कंप!
सारंगढ़-बिलाईगढ़। छत्तीसगढ़ सरकार जिस ‘स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय योजना’ को सूबे की शिक्षा क्रांति का चेहरा बनाकर देश भर में वाहवाही लूटती है, उसकी जमीनी हकीकत अंदर से कितनी खोखली और भयावह हो चुकी है, इसका एक जीता-जागता और झकझोर देने वाला प्रमाण सामने आया है। मामला सारंगढ़ तहसील के अंतर्गत आने वाले शासकीय स्वामी आत्मानंद हायर सेकेंडरी स्कूल, गोड़म का है, जहाँ के प्राचार्य ने कैमरे के सामने सरकार की नीतियों और मंशा की ऐसी धज्जियां उड़ाई हैं, जिसे सुनकर पूरे शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।
एक बेबस पालक जब अपने बच्चे का दाखिला कराने स्कूल पहुंचा, तो प्राचार्य ने जो ‘तुगलकी गणित’ समझाया, उसने पूरी सरकारी व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
“60 बच्चे पास हुए, तो बाहर से सिर्फ 6 का एडमिशन…” — प्राचार्य का अजीबोगरीब नियम
पूरा मामला तब उजागर हुआ जब एक स्थानीय ग्रामीण/पालक अपने बच्चे का कक्षा 9वीं और 10वीं में एडमिशन करवाने के लिए गोड़म आत्मानंद स्कूल पहुंचा। 10वीं कक्षा में सीधे प्रवेश (Direct Admission) की उम्मीद लेकर पहुंचे पालक को प्राचार्य ने साफ मना कर दिया। जब पालक ने वजह जाननी चाही, तो प्राचार्य ने जो तर्क दिया वह हैरान करने वाला है।
प्राचार्य ने कैमरे पर साफ कहा:
“10वीं कक्षा में इस साल बाहर से आने वाले बच्चों की सीधी भर्ती नहीं हो पाएगी। हमारे पास सिर्फ 10% सीटों पर ही एडमिशन लेना है। पिछले वर्ष हमारे स्कूल की 9वीं कक्षा से कुल 60 बच्चे पास होकर 10वीं में गए हैं, लिहाजा उस हिसाब से इस वर्ष बाहर से मात्र 6 नए बच्चों को ही 10वीं कक्षा में एडमिशन दिया जाएगा।”
वीडियो वायरल: जब खुद ‘गुरुजी’ ही खोलने लगे सरकार की ‘गुप्त नीतियां’
स्टिंगओप्रशन एक वीडियो में ज़िम्मेदार पद पर बैठे प्राचार्य महोदय बिना किसी डर के कैमरे के सामने सरकार के सिस्टम की बखिया उधेड़ते नजर आ रहे हैं। वीडियो में प्राचार्य ने साफ तौर पर सरकार की मंशा पर गंभीर आरोप लगाए हैं:
सरकारी स्कूलों में भी वसूली: प्राचार्य ने कबूला कि अब सरकारी और आत्मानंद स्कूलों में भी अंदरखाने फीस लग रही है, जिससे गरीब बच्चों के लिए पढ़ाई मुश्किल हो गई है।
स्कूल बंदी की साजिश: सरकारें लगातार सरकारी स्कूलों को बंद करने या उन्हें पंगु बनाने की राह पर चल रही हैं।
शिक्षकों की भर्ती पर ताला: स्कूलों में जानबूझकर नए शिक्षकों की भर्ती नहीं की जा रही है ताकि इंफ्रास्ट्रक्चर खुद-ब-खुद दम तोड़ दे।
गरीब विरोधी मंशा: प्राचार्य ने बातचीत के अंत में सीधे शब्दों में कह दिया कि— “कुल मिलाकर सरकार की मंशा ही यही है कि गरीब के बच्चे आगे पढ़ ही न पाएं!”
जनता के तीखे सवाल: अगर सिर्फ 6 को जगह मिलेगी, तो बाकी बच्चे कहाँ जाएंगे?
इस सनसनीखेज खुलासे के बाद स्थानीय ग्रामीणों, पालकों और छात्र संगठनों में भारी आक्रोश व्याप्त है। लोग अब सीधे जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से ये तीखे सवाल पूछ रहे हैं:
1. शिक्षा के अधिकार का मज़ाक: यदि 9वीं पास 60 बच्चों के आधार पर बाहर से सिर्फ 6 बच्चों को ही प्रवेश मिलेगा, तो क्षेत्र के अन्य स्कूलों से आने वाले दर्जनों गरीब बच्चे शिक्षा के मौलिक अधिकार से वंचित होकर क्या मजदूरी करेंगे?
2. आत्मानंद मॉडल का ढोंग: जिस स्कूल को ‘निजी स्कूलों की तर्ज पर मुफ्त और उच्च शिक्षा’ देने के नाम पर प्रचारित किया गया, वहाँ सीटों की ऐसी किल्लत और अघोषित बैन क्यों?
3. उच्च अधिकारियों का मौन: क्या जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) और सारंगढ़ कलेक्टर को इस ‘10% वाले कथित फॉर्मूले’ की जानकारी है या फिर गोड़म स्कूल में प्राचार्य अपनी मर्जी का कानून चला रहे हैं?
कार्रवाई होगी या सच को दबा दिया जाएगा?
एक शासकीय स्कूल के संस्था प्रमुख (प्राचार्य) द्वारा ऑन-कैमरा सरकार की मंशा को कोसना और व्यवस्था को पूरी तरह फेल बताना यह साबित करता है कि सरकारी स्कूलों के भीतर हालात बेकाबू हो चुके हैं। अब देखना यह होगा कि इस वीडियो के वायरल होने के बाद सारंगढ़ का जिला प्रशासन और स्कूल शिक्षा विभाग इस ‘10% एडमिशन फॉर्मूले’ पर क्या सफाई देता है? क्या गरीब बच्चों को स्कूलों में जगह मिलेगी, या हमेशा की तरह इस मामले को भी अधिकारियों की साठगांठ से ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?




