सरकारी फंड डकार कर खुद की पीठ थपथपा रहा विनायक एकेडमी! मुफ्त यूनिफॉर्म के नाम पर मंधाईभाठा में स्कूल प्रबंधन का शर्मनाक पब्लिसिटी स्टंट बेनकाब!

मुफ्त यूनिफॉर्म वितरण के दावों पर उठे सवाल; जब सरकार देती है फंड, तो स्कूल क्यों ले रहा क्रेडिट?
सारंगढ़ बिलाईगढ़ / मंधाईभाठा स्थानीय विनायक एकेडमी इंग्लिश हायर सेकेंडरी स्कूल में शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत पढ़ने वाले बच्चों को स्कूल प्रबंधन द्वारा यूनिफॉर्म बांटने के कार्यक्रम पर अब सवाल खड़े होने लगे हैं। एक तरफ जहां स्कूल प्रबंधन इसे अपनी ओर से एक ‘राहत भरा कदम’ और ‘जनकल्याणकारी पहल’ बताकर प्रचारित कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ जानकारों और जागरूक नागरिकों ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।
सरकारी नियमों की अनदेखी का आरोप
नियमानुसार, शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश लेने वाले आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों की पढ़ाई, स्कूल फीस, यूनिफॉर्म और पाठ्यपुस्तकों का पूरा खर्च सरकार द्वारा वहन किया जाता है। सरकार इसके लिए निजी स्कूलों को प्रति छात्र के हिसाब से बकायदा फंड (प्रतिपूर्ति राशि) जारी करती है।
ऐसे में केजी से कक्षा दूसरी तक के बच्चों को यूनिफॉर्म देने के इस कार्यक्रम को स्कूल की ‘निःशुल्क और व्यक्तिगत पहल’ के रूप में पेश किया जाना सरकार के योजना को लोगों से छुपाना है
सवाल यह है कि जब RTE नियमों के तहत बच्चों को किताबें और यूनिफॉर्म जैसी बुनियादी चीजें सरकार की तरफ से मुफ्त उपलब्ध कराई ही जाती हैं, तो स्कूल प्रबंधन इसे अपनी जेब से किया गया उपकार या ‘दान’ साबित करने की कोशिश क्यों कर रहा है?
पालकों को भ्रमित करने की कोशिश?
स्थानीय शिक्षाविदों का कहना है कि कार्यक्रम के दौरान पालकों का तिलक लगाकर और पुष्प भेंट कर स्वागत करना महज एक पब्लिसिटी स्टंट था, ताकि स्कूल अपनी ब्रांडिंग कर सके। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को यह अहसास कराना कि स्कूल उन पर कोई बड़ी मेहरबानी कर रहा है, RTE अधिनियम की मूल भावना के खिलाफ है। बच्चों को जो अधिकार सरकार और कानून से मिला हुआ है, उसे स्कूल प्रबंधन अपनी ‘संवेदनशीलता’ और ‘महानता’ के रूप में भुनाने का प्रयास कर रहा है।
इस पूरे मामले पर कुछ अभिभावकों का दबी जुबान में यह भी कहना है कि यदि स्कूल वाकई बच्चों के प्रति संवेदनशील है, तो उसे सरकार से मिलने वाले फंड का पूरा हिसाब सार्वजनिक करना चाहिए, न कि सरकारी योजनाओं के दम पर अपनी खुद की पीठ थपथपानी चाहिए।




