सारंगढ

विनायक अकादमी मंधाईभाठा में शिक्षा के नाम पर ‘लुखी लूट’: बिना प्रिंट रेट की किताबें और ₹10,500 फीस से सहमे पालक! स्कूल और विशेष कपड़ा दुकान की ‘साठगांठ’ उजागर!

शिक्षा के नाम पर खुली लूट: विनायक अकादमी मंधाईभाठा में पालकों की जेब पर डाका, स्कूल और विशेष कपड़ा दुकान की ‘साठगांठ’ उजागर

सरसींवा। क्षेत्र के प्रतिष्ठित कहे जाने वाले ‘विनायक अकादमी इंग्लिश हायर सेकेंडरी स्कूल, मदईभाठा’ में शिक्षा की आड़ में व्यापार और पालकों के खुले आर्थिक शोषण का एक बड़ा मामला सामने आया है। स्कूल प्रबंधन द्वारा जारी एक तुगलकी फरमान और किताबों-फीस के नाम पर की जा रही अवैध वसूली को लेकर स्थानीय पालकों में भारी आक्रोश है। आरोप है कि स्कूल संचालक ने शिक्षा को सेवा नहीं, बल्कि मोटी कमाई का जरिया बना लिया है।

यूनिफॉर्म के नाम पर ‘कमीशन का खेल’, खास दुकान से खरीदने का दबाव

हाल ही में विनायक अकादमी के प्रबंधन द्वारा एक सुचना जारी किया गया है। इसमें सभी अभिभावकों को निर्देशित किया गया है कि वे 15 जुलाई तक अपने बच्चों के लिए स्कूल यूनिफॉर्म अनिवार्य रूप से खरीद लें। हैरान करने वाली बात यह है कि इस सुचना (नोटिस) में बकायदा दुकान का नाम लिखते हुए निर्देश दिया गया है कि यूनिफॉर्म केवल ‘पुरुषोत्तम क्लॉथ सेंटर, सरसींवा’ से ही खरीदी जाए।

पालकों का आरोप है कि स्कूल संचालक और पुरुषोत्तम कपड़ा दुकान के बीच अंदरूनी ‘सेटिंग’ (कमीशनखोरी) है। इस एकाधिकार का फायदा उठाकर दुकान संचालक पालकों से मनमाना रेट वसूल रहा है और विरोध करने पर बच्चों को अप्रत्यक्ष धमकी दी जाती है।

बिना प्रिंट रेट (MRP) की किताबें; नर्सरी के बच्चों से ₹2000 की वसूली

शोषण का यह खेल सिर्फ यूनिफॉर्म तक ही सीमित नहीं है। नियमों को ताक पर रखकर स्कूल में ऐसी किताबें चलाई जा रही हैं, जिन पर कोई मूल्य (MRP) ही छपा नहीं है।

नर्सरी और क्लास 1 जैसे छोटे बच्चों के कोर्स के लिए पालकों से ₹2,000 की जबरन वसूली की जा रही है।

बिना प्रिंट रेट के किताबें बेचना कानूनी रूप से अपराध है, लेकिन शिक्षा विभाग की नाक के नीचे यह अवैध कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है।

क्लास 1 और 2 की फीस ₹10,500; ग्रामीण क्षेत्र में ‘फीस माफिया’ का आतंक

महंगाई के इस दौर में विनायक स्कूल ने लूट की सारी हदें पार कर दी हैं। स्कूल द्वारा कक्षा पहली (Class 1) और दूसरी (Class 2) के छोटे बच्चों के लिए ₹10,500 (दस हजार पांच सौ रुपये) फीस निर्धारित की गई है। ग्रामीण और मध्यमवर्गीय पृष्ठभूमि वाले इस क्षेत्र में इतनी भारी-भरकम फीस वसूलना सीधे तौर पर पालकों को कंगाल करने जैसा है।

अतीत में मुफलिसी, आज शिक्षा के नाम पर साम्राज्य!

स्थानीय लोगों और अतीत से वाकिफ नागरिकों का कहना है कि आज पालकों का खून चूसने वाले इस संस्थान के संचालक की पृष्ठभूमि बेहद साधारण रही है। संचालक के पिता कभी स्थानीय मड़ई-मेलों में बांस के डंडे पर माला-मोती बेचने का छोटा-मोटा काम करते थे और बाकी दिनों में ‘दुर्गेश टेलर’ के पास दैनिक मजदूरी (कारीगरी) कर परिवार का भरण-पोषण करते थे। लेकिन आज उसी परिवार द्वारा संचालित स्कूल में जिस तरह से पैसे की हवस दिखाई जा रही है, उसने क्षेत्र के लोगों को हैरान कर दिया है। मेहनत की कमाई से अमीर बनना गलत नहीं है, लेकिन गरीब और मध्यमवर्गीय पालकों की मजबूरी का फायदा उठाकर ‘शिक्षा माफिया’ बन जाना बेहद निंदनीय है।

प्रशासन से कार्रवाई की मांग

इस पूरी मनमानी और अवैध वसूली को लेकर पालकों में गहरा असंतोष है। जागरूक नागरिकों और पीड़ित अभिभावकों ने जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) और स्थानीय प्रशासन से मांग की है कि:

1. विनायक अकादमी की फीस संरचना की जांच हो।
2. बिना प्रिंट रेट की किताबें बेचने और एक ही दुकान से यूनिफॉर्म खरीदने के दबाव बनाने वाले इस सिंडिकेट पर तुरंत ताला लगाया जाए।

KRISHNA MAHILANE

EDITOR IN CHIEF https://teekhi-mirchi.com CONTACT US- 6260567537

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