महाघोटाला: सारंगढ़-बिलाईगढ़ में ‘एक ही खसरे’ पर दो-दो जगह बेचा गया धान, उजागर हुई 17 रसूखदार किसानों की नाम!

विशेष खोजी रिपोर्ट….
सारंगढ़-बिलाईगढ़। जिले के धान खरीदी सत्र 2025-26 में सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का चूना लगाने का एक ऐसा शातिर और सुनियोजित खेल सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था की नाक के नीचे चल रहे सिंडिकेट को बेनकाब कर दिया है। ‘बिजनिगम’ (बरमकेला) और क्षेत्र की प्राथमिक सेवा सहकारी समितियों के बीच कागजों की हेराफेरी कर एक ही रकबे और समान खसरा नंबर पर दो-दो बार धान खपाने का सनसनीखेज महाघोटाला उजागर हुआ है।
इस पूरे खेल में समितियों के प्रबंधकों, कंप्यूटर ऑपरेटरों और रसूखदार बिचौलियों की मिलीभगत साफ नजर आ रही है, जिन्होंने दोहरा धान बेचकर करोड़ों रुपये का वारा-न्यारा कर दिया।
नियमों के मुताबिक, एक बार जिस खसरा नंबर और रकबे (जमीन के टुकड़े) पर धान की बिक्री हो जाती है, उस पर दोबारा धान नहीं खरीदा जा सकता। लेकिन इस घोटाले के मास्टरमाइंड्स ने इतनी चालाकी दिखाई कि उसी समान रकबे और खसरे पर ‘बीजनिगम’ में भी धान बेच दिया और ‘सेवा सहकारी समिति’ के केंद्रों में भी। यानी जमीन वही, खसरा नंबर वही, लेकिन उस पर दो अलग-अलग जगहों से भुगतान उठा लिया गया। यह सीधे तौर पर शासन की आंखों में धूल झोंकने और वास्तविक और गरीब किसानों के हक पर डाका डालने का मामला है।
जांच के घेरे में आए 17 संदिग्ध नाम (सूची आई सामने)
इस दोहरे फर्जीवाड़े के जरिए सरकारी राशि का अवैध लाभ उठाने वाले जिन 17 लोगों के नाम सामने आए हैं, वे इस प्रकार हैं:
1/ निराकार पटेल
2 रामनारायण नायक
3 राम दयाल पटेल
4 शेखर नायक
5 कमला नायक
6 महेन्द्र कुमार नायक
7 जयराम पटेल
8 सोहन पटेल
9 सुभद्रा नायक
10 अरुण कुमार पटेल
11 कौशिल्या पटेल –
12 रुकमणी नायक
13 जितेन्द्र कुमार नायक
14 गोपी चंद्र पटेल
15 डिलेश्वर पटेल
16 रमेश कुमार पटेल
17 नंदलाल पटेल
तीखे सवाल: कंप्यूटर ऑपरेटर और कंप्यूटर क्रेडेंशियल पर क्यों नहीं रखी गई नजर?
बड़ा सवाल: जब धान खरीदी की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और पारदर्शी होने का दावा किया जाता है, तो सॉफ्टवेयर ने एक ही खसरा नंबर पर दो अलग-अलग विभागों (बीजनिगम और सहकारी समिति) में प्रविष्टि (Entry) को स्वीकार कैसे किया? साफ है कि बिना कंप्यूटर ऑपरेटरों के क्रेडेंशियल के इस्तेमाल और प्रबंधकों के संरक्षण के यह मुमकिन ही नहीं था।
कड़ी कार्रवाई और रिकवरी की उठ रही मांग
इस खुलासे के बाद से ही ईमानदार किसानों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। स्थानीय स्तर पर मांग तेज हो गई है कि:
. इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच हो।
. दोनों जगहों के डिजिटल रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजैक्शन और भौतिक सत्यापन (Physical Verification) का मिलान किया जाए।
.दोषी अधिकारियों और बिचौलियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर जेल भेजा जाए और अवैध रूप से ली गई राशि की कुर्की कर रिकवरी की जाए। इस भ्रष्टाचार का लगातार समाचार प्रकाशन किया गया है बावजूद अभी तक कोई संज्ञान नही लिया गया है!
अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस संगठित सिंडिकेट पर कब और कितनी सख्त कानूनी कार्रवाई करता है।




