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राज्य कर्मचारी संघ ने की जिला शिक्षा अधिकारी कोरबा की कलेक्टर से शिकायत

राज्य कर्मचारी संघ ने की जिला शिक्षा अधिकारी की मनमानी पर अंकुश लगाने जिलाधीश से मांग ।

45 वर्ष से कम उम्र के शिक्षकों व कर्मचारियों को बिना टीकाकरण फ्रंट लाइन में ड्यूटी लगाने से शिक्षकों में भारी आक्रोश

मौखिक निर्देश पर कार्य न करने का है सामान्य प्रशासन विभाग का आदेश

कोरबा । राज्य कर्मचारी संघ छत्तीसगढ़ के जिला इकाई कोरबा के अध्यक्ष एस एन शिव जिला उपाध्यक्ष सुरेन्द्र कुमार खुंटे, संतोष शुक्ला , मनोज कुमार टंडन , श्रीमती गीता देवी हिमधर ,पी के साहू ,धनेन्द्र सिंह राजपूत, जिला प्रवक्ता कमल कुमार खुंटे, जिला सचिव रामनारायण प्रधान , जिला कोषाध्यक्ष अनूप कुमार कौशिक, संगठन सचिव गौरी शंकर जायसवाल, कोरबा ब्लॉक अध्यक्ष गोपाल प्रसाद भारद्वाज ,पोड़ी उपरोड़ा ब्लॉक अध्यक्ष अरुण पाल ओगरे ,पाली ब्लॉक अध्यक्ष टेकराम श्रीवास, हीरा दास एवं जिला एवं ब्लाक के पदाधिकारी सहित समस्त कार्यकारिणी सदस्यों ने 10 मई को जिला शिक्षा अधिकारी कोरबा सतीश कुमार पांडे के खिलाफ जिलाधीश महोदया कोरबा से लिखित शिकायत किया है।

राज्य कर्मचारी संघ छत्तीसगढ़ जिला इकाई कोरबा एस एन शिव ने कहा कि डीईओ कोरबा द्वारा शिक्षकों का मनोबल कमजोर करने तथा प्रताड़ित करने नियम विरुद्ध किए जा रहे मौखिक आदेश की राज्य कर्मचारी संघ कड़ी निंदा करता है , तथा जिलाधीश महोदया कोरबा से हस्तक्षेप करने की मांग भी की है ।

राज्य कर्मचारी संघ कोरबा के जिला अध्यक्ष एस एन शिव ने कहा कि जिला शिक्षा अधिकारी कोरबा सतीश कुमार पांडे द्वारा वर्चुअल मीटिंग के दौरान विकास खंड शिक्षा अधिकारियों एवं प्राचार्यों को निर्देशित किया गया है कि कोरोना ड्यूटी से बचे हुए समस्त शिक्षक – शिक्षिकाओं को शाला बुलाया जाए तथा उपस्थिति पंजी में हस्ताक्षर कराया जाए । तदुपरांत उपस्थिति पंजी के आधार पर वेतन का आहरण किया जाए। जिला शिक्षा अधिकारी कोरबा श्री पांडे का फरमान इतना में ही नहीं रुका इन्होंने गर्भवती माताओं , शिशुवती माताओं , 60 वर्ष से ऊपर के उम्र के शिक्षक को भी डोर टू डोर एक्टिव सर्विलांस करने व प्रति दिवस 50 घर का सर्वे करने के उपरांत ही वेतन आहरण करने की बातें कहीं। इतने पर भी नहीं रुके उन्होंने कर्मचारियों के घर में अन्य व्यक्ति के कोविड पॉजिटिव होने पर भी उस कर्मचारी को ड्यूटी पर आने के लिए निर्देश दे दिया । एक जिम्मेदार अधिकारी द्वारा यह कितनी बड़ी लापरवाही पूर्वक बात है। क्योंकि पॉजिटिव व्यक्ति के घर में रहने वाले सभी सदस्य संदेहास्पद होते हैं। उनको शासन द्वारा कड़ी निगरानी में रखा जाता है। खेद जनक है कि शिक्षा विभाग के मुखिया जिला शिक्षा अधिकारी को इतना भी नहीं मालूम कि होम क्वॉरेंटाइन वाले व्यक्ति के घर के दरवाजे पर रेड रिबन लगाया जाता है तथा दरवाजा सील किया जाता है । राशन एवं अन्य सामग्री की आपूर्ति प्रशिक्षित टीम द्वारा किया जाता है। दरवाजा पर कोविड पॉजिटिव का स्टीकर चिपकाया जाता है , तथा उस घर के किसी भी व्यक्ति का घर से बाहर निकलना निषिद्ध रहता है। जिला प्रशासन की नजर में वाहवाही बटोरने केवल मोबाइल फोन में वर्चुअल बैठक करने से कुछ होने वाला नहीं है । जमीनी स्तर की कोई एक्शन प्लान की जानकारी भी होनी चाहिए ।

अवगत हो कि जिले के पंचायत एवं नगरीय निकाय क्षेत्र में एक्टिव सर्विलांस टीम पहले से ही काम कर रही हैं। जिसमें प्रत्येक दल में प्रभारी के रूप में शिक्षक को तैनात किया गया है तथा उसके साथ में उस वार्ड की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी सहायिका तथा मितानिन को शामिल किया गया है, वहीं पंचायत क्षेत्रों में पंचायत सचिव को भी शामिल किया गया है। जिसकी मॉनिटरिंग के लिए शिक्षा विभाग के एक अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी , आईसीडीएस विभाग से सुपरवाइजर, नगर निगम/ निकाय एक अधिकारी , राजस्व विभाग से पटवारी को निगरानी अधिकारी नियुक्त किया गया है। इन्हीं के देखरेख में एक्टिव सर्विलांस दल , निगरानी दल लक्षण रहित एवं लक्षण सहित लोगों का डोर टू डोर सर्वे का कार्य कर रहे हैं । ऐसे लोगों को टीम द्वारा दवा की कीट भी उपलब्ध कराई जा रही है। जिसमें ड्यूटी में रोटेशन भी किया जा रहा है। लोक उपक्रमों से संबंधित कॉलोनियों में संबंधित लोक उपक्रम भी अपनी तरफ से निगरानी कर रहे हैं , जिसमें एनटीपीसी , सीएसईबी, एसईसीएल आदि शामिल हैं। जिसकी जानकारी शायद जिला शिक्षा अधिकारी को नहीं है इसीलिए उन्होंने शिक्षक – शिक्षिकाओं को बिना गाइडलाइन के मनमानी पूर्वक सर्वे के लिए भेजे जाने का आदेश जारी कर दिया है, जो कि मौखिक है । दूसरी बात यह है कि जिले में संपूर्ण लाॅक डाउन चल रहा है । पब्लिक ट्रांसपोर्ट के साथ-साथ प्राइवेट ट्रांसपोर्ट के साधन भी प्रतिबंधित हैं ।अति आवश्यक सेवा से जुड़े नौकरी पेशा व चिकित्सा कर्मियों का पास बना हुआ है। पास के आधार पर आना – जाना चल रहा है । उल्लेखनीय है कि कोरोना वारियर एवं कोविड कर्मचारी को छोड़ किसी अन्य व्यक्ति या शासकीय कर्मचारियों को भी पेट्रोल प्रदाय करने की निषेधाज्ञा लागू है , जिसकी जानकारी जिला शिक्षा अधिकारी को नहीं होना मालूम पड़ता है। शासन की ऐसी कोई भी महती योजना नहीं है , जिसमें शिक्षकों ने अपना महत्वपूर्ण योगदान ना दिया हो । कोरोना वायरस महामारी के विरुद्ध चलाए जा रहे शासन के अभियान में शिक्षक – शिक्षिकाएं पहले से ही कांटेक्ट ट्रेसिंग, एक्टिव सर्विलांस दल, टीकाकरण दल में सहयोगी, नोडल अधिकारी, कंप्यूटर ऑपरेटर , जिला एवं ब्लाक , तहसील तथा अनुविभागीय अधिकारी ,जिला चिकित्सालय, कलेक्टोरेट, जिला पंचायत कार्यालय के कंट्रोल रूम में अपनी जान की परवाह न करते हुए सेवा दे रहे हैं । कार्य के दौरान अनेक शिक्षक संक्रमित भी हो चुके हैं तथा संक्रमण उनके घर के अन्य सदस्यों तक भी फैल चुका है। जिला अस्पताल में ट्रेसिंग कर रहे शिक्षक दुकालू राम देवांगन, पीएचसी आनंदनगर में ट्रेसिंग कर रहे व्याख्याता राम कुमार पात्रे, व्याख्याता राजेश कुमार राठौर संक्रमित हो चुके हैं तथा उनके घर के अन्य लोग भी संक्रमित हो गए हैं। उल्लेखनीय है कि 45 वर्ष से कम उम्र के शिक्षा विभाग के कर्मचारियों को स्वास्थ्य विभाग ने या जिला प्रशासन ने टीका भी नहीं लगाया है, वहीं दूसरी ओर फ्रंटलाइन कोरोना वारियर भी नहीं माना है , 50 लाख का बीमा सुविधा भी नहीं दिया गया है । इसके उपरांत भी शिक्षक बिना किसी शिकायत के शासन – प्रशासन को इस आपदा की घड़ी में सहयोग दे रहे हैं । इतने के उपरांत भी जिला शिक्षा अधिकारी श्री पांडे का शिक्षकों के प्रति इस तरह का नकारात्मक व्यवहार शिक्षकों को हताश और निराश कर उनका मनोबल को गिराने वाला है । स्पष्ट है इन सबके पीछे एक ही उद्देश्य है कि शिक्षकों को इतना प्रताड़ित करो कि वह जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा किए जा रहे मनमानी का विरोध न कर सकें। जिसकी जितनी भी निंदा की जाए कम है । जिला शिक्षा अधिकारी कोरबा की मनमानी की शिकायत राज्य कर्मचारी संघ के प्रांत अध्यक्ष शशिकांत गौतम, प्रांतीय महामंत्री अश्वनी चेलक, एवं प्रांतीय सचिव धरम लहरे तक पहुंचा दी गई है । उन्होंने कहा है कि राज्य कर्मचारी संघ छत्तीसगढ़ कर्मचारियों के साथ है, इस मनमानी की शिकायत राज्य शासन से की जाएगी।

श्री के आर मिश्रा , अपर सचिव छत्तीसगढ़ शासन ,सामान्य प्रशासन विभाग मंत्रालय महानदी भवन , रायपुर के परिपत्र दिनांक 6 फरवरी 2014 के द्वारा उच्च स्तर से प्राप्त मौखिक निर्देश /आदेश/ हिदायतों की लिखित पुष्टि नोटशीट में लेने के निर्देश जारी किए गए हैं, जिसकी जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा अवहेलना की जाती है , विवादास्पद आदेश मौखिक ही दिए जाते हैं । इनके द्वारा पूर्व में भी विद्यालयों के गणवेश परिवर्तित करने का मौखिक निर्देश जारी किया गया था, परंतु विवाद की स्थिति निर्मित होने पर साफ इंकार कर दिया गया था।
जिला शिक्षा अधिकारी कोरबा द्वारा दिया गया मौखिक आदेश वापस न लेने की स्थिति में आगामी समय में व्यापक आंदोलन प्रारंभ किया जाएगा। जिसकी समस्त जवाबदारी जिला शिक्षा अधिकारी सतीश कुमार पांडे की होगी। वहीं राज्य कर्मचारी संघ छत्तीसगढ़ के जिला इकाई अध्यक्ष कोरबा एस एन शिव ने जिलाधीश महोदया कोरबा से जिला शिक्षा अधिकारी की मनमानी तथा नियम विरुद्ध मौखिक निर्देश पर अंकुश लगाने की भी मांग की है।

KRISHNA MAHILANE

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